X Close
X
7499472288

वन विभाग की मिलीभगत के चलते चकमा देकर फर्जी आदेश पर काट लिए गए कई दर्जन अवैध पेड़


file_5d530e5364dc5
Lucknow:  कादीपुर सुलतानपुर मनोज पांडेय   मामला कादीपुर तहसील के मुजहना मामूर पट्टी गांव का है जहां पर मुजहना गांव निवासी श्रीपति मिश्र द्वारा वन विभाग के अधिकारियों को चकमा देकर कई पेड़ कटवा लिए  । बताते चलें कि विगत कुछ दिनों पहले मुजहना मामूर पट्टी निवासी श्रीपति मिश्र द्वारा 92 नंबर बाग से पेड़ कटवाने का आदेश वन विभाग द्वारा लिया गया ।  जबकि वह 92 नंबर बाग श्रीपति मिश्र के नाम दर्ज ना होकर राम आसरे मिश्रा के नाम दर्ज है । जिस पर वन विभाग द्वारा फर्जी आदेश लेकर 92 नंबर की बाग से सटे हुए खेत में जो राम असर मिश्रा के ही पिता स्वर्गीय राम यज्ञ मिश्रा का खेत है जिसमे उन्होंने अपने जीवन काल में काफी सारे पेड़ लगाए थे और अब उनके देहांत के बाद से सागौन के साथ और भी कई पेड़ इसी तरह से फर्जी गुमराह करके कटवा लिए गए।            सूचना मिलने पर 100 नंबर पुलिस को सूचना दी गई परंतु पुलिस के पहुंचने से पहले ही सारे पेड़ कट चुके थे। वन विभाग के अधिकारी से जब स्वतंत्र प्रभात के संबाददाता ने पुछा कि अगर गलत तरीके से परमिशन दे दी जाती है तो उसपर आप लोग क्या करते है तो उन्होंने कहाँ कि उसे कैंसिल कर दिया जाता है लेकिन आगे जब पुछा गया कि इस मामले में तो पेड़ को काट दिया गया है इसपर आप कैसे करेंगे तो उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था l पहले भी कई बार इसी तरह से डायल 100 पर शिकायत की गयी थी और मौके पर कटे हुए पेड़ रखवा दिये गये थे और अब पहले के कटे हुए पेड़ भी वहां से गायब हो चूके है और नए पेड़ो को काटने का सिलसिला बादस्तूत जारी है l पेड़ काटने के मामले में श्रीपति मिश्रा के साथ उनके सहयोगी लल्लू ठेकेदार, अवधेश सिंह जो कही बाहर से आये थे ये लोग भी शामिल है l  इस विषय पर जब वन विभाग के अधिकारियों से बात की गई तो वह भी पेड कटने की परमिशन देना स्वीकार किया। और बताया कि उनके द्वारा फर्जी तरीके से आदेश दिलवा दिया गया था कि बुजुर्ग थे इस वजह से भरोसे में दे दिया गया होगा यहाँ समझने वाली बात ये भी है कि जहाँ एक तरफ पेड़ कि सुरक्षा और नए पेड़ो को लगवाने के लिए सरकार ने पूरी ताक़त झोक दी है वही जो पेड़ लगे हुए है उन्हें बचाने केलिए उन्ही का  विभाग कितना गंभीर है। इस एक घटना से अंदाजा लगाया जा सकता है।  जानकारी ये भी आ  रही है कि वन विभाग बाकी के भी सभी मामले में इसी तरह से गैरजिम्मेदारी से काम करता रहता है  । परंतु यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि विभाग का काम यही है कि यदि कोई परमिशन लेने आता है तो उसे परमिशन दे दी जाती है अब वहां पर कोई जांच तो करने जाएगा नहीं । यदि उन्होंने गलत किया है तो आप संबंधित थाने पर एफ आई आर दर्ज करवाएं।  इस विषय पर  जब मीडियाकर्मियों ने घटनास्थल पर पहुंचकर फोटो या वीडियो बनाने का प्रयास किया तो श्रीपति मिश्र द्वारा फोटो या वीडियो बनाने से साफ-साफ इंकार कर दिया गया। इस विशेष पर जब पीड़ित पक्ष से बात कीगई तो उन्होंने थाने में मुकदमा दर्ज करवाने की बात कही। देखने वाली बात ये भी होगी कि क्या आला अधिकारी इस मामले को संज्ञान में लेकर कोई कार्यवाही करेंगे या फिर बाकी सभी मामलो कि तरह लटकाने और भटकाने कि प्रक्रिया का पालन किया जायेगा और मामले को दबाने का प्रयास किया जायेगा । ये आने वाला समय ही बताएगा।