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साइबर कैफे संचालक से ग्राहक त्रस्त, जिम्मेदारों की मिलीभगत से कैफे बना वसूली का अड्डा।


Lucknow: साइबर कैफे संचालक से ग्राहक त्रस्त, जिम्मेदारों की मिलीभगत से कैफे बना वसूली का अड्डा। उमेश दुबे (रिपोर्टर ) भदोही। सरकार भले ही सरकारी कार्यों में भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शिता की बात करती है लेकिन यह बात जिले में तैनात कुछ लापरवाह व भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से खुब फल फूल रहा है। इसका ताजा उदाहरण भदोही जिले के कुशियरा में देखने को मिला जहां एक साइबर कैफे संचालक का मनमानी और दबंगई सामाने आया है।मालूम हो कि कुशियरा में लोकवाणी जन सेवा केन्द्र डाटनेट साइबर कैफे के नाम पर चलता है। इस कैफे का संचालक विकास विश्वकर्मा भोली भाली जनता से राशनकार्ड में नाम बढाने या सुधार करने के नाम मनमानी वसूली करता है और इसकी शिकायत करने पर दबंगई पर उतारू हो जाता है। और लोगों के साथ बदतमीजी करता है। इस साइबर संचालक के खिलाफ दो मई को अपना दल के प्रदेश सचिव डीएम सिंह गहरवार ने ईडीएम से की थी लेकिन कोई कार्यवाही न हुई। शुक्रवार को एक महिला की शिकायत के बाद डीएम सिंह ने अपने दो कार्यकर्ताओ को जानकारी लेने के लिए भेजा तो संचालक धमकाते हुए सेंटर बंद करके एसडीएम को सूचित किया और पुलिस ने दोनो युवको प्रियांशु सिंह और शिवम सोनकर को शांति भंग की आशंका में चालान करके जेल भेज दिया। इसी सेंटर पर अपना राशन कार्ड बनाने के लिए आवेदन करने आया एक युवक ने बताया कि विकास विश्वकर्मा ने मुझसे एक हजार रूपया लिया था लेकिन काम न होने से मैने जब पूछा तो संचालक मेरी गर्दन पकडकर बाहर ढकेल दिया और मेरा कागज फेक दिया। और केवल दो सौ रूपये लौटा रहा था। युवक ने यह भी कहा कि यहां पर मेराज नामक युवक है जो खुद को सपा का नेता बताकर दबंगई करता है। इसी तरह कई शिकायते है। इस साइबर कैफे संचालक पर लेकिन पता नही क्यों प्रशासन मेहरबान है इस पर। सूत्रों से मिली जानकारी से यह पता चला है कि इस साइबर कैफै पर भदोही तहसील के कुछ अधिकारी और कर्मचारियों का कालाबाजारी करने के लिए जमावडा होता है। इस घटना को लेकर लोगों में यह चर्चा है कि आखिर किसकी कृपा से कुशियरा का साइबर कैफै संचालक इतना मनमानी और गुंडई कर रहा है? क्या इस संचालक के पीछे किसी बडे अधिकारी या नेता का हाथ है जो खुलेआम लोगों के साथ बदतमीजी और मनमानी करने पर उतारू हो जाता है। The post साइबर कैफे संचालक से ग्राहक त्रस्त, जिम्मेदारों की मिलीभगत से कैफे बना वसूली का अड्डा। appeared first on दैनिक स्वतंत्र प्रभात हिंदी अख़बार.